TIFFIN (डब्बा)
TIFFIN - डब्बा हम सब चींटी की जिंदगी बिता रहे है। जैसे जीवन का कोई मतलब ही ना हो। काम करना और बस काम करना यही हमारी जिंदगी है। मेरा नाम रवी है और मैंं अपने ऑफ़िस में काफी महशुर हूं, लग भग सारे ही लोग मेरे दोस्त है सिवाए राजीव के। राजीव जो तीन साल से हर बार Employee of the year बन चुका है। राजीव पूरा मन लगा के काम करता था। सब काम से ध्यान हटाकर दुनिया पर ध्यान रखते थे पर वह दुनिया से ध्यान हटाकर काम पर ध्यान रखता था। शायद ये काम करना उसे पसंद होगा , पता नहीं उसे इन सब से खुशी कैसे होती होगी। राजीव कभी बोनस नहीं लेता , कभी कभी तो लगता था के कितना घमंडी है वो। राजीव ज्यादा किसी से बात भी नहीं करता था और वो मुझसे भी तभी बात करता जब मैंं सामने से उससे बात करू । जब भी उससे बात करने की कोशिश करो तब वो बस अपनी बीवी की तारीफ ही करता। और राजीव इतना बड़ा भुख्खड था के पूरे वक्त अपने टिफिन को ही देखता था, मानो कोई शाही पकवान हो उसमे । इसीलिए वो टिफिन ऑफिस में नहीं कहीं और जाकर खाता था, मैंंने कभी उसे खाते वक्त नहीं देखा इसलिए मुझे नहीं पता के उस टिफिन में क्या था। और मैंं अकेला नहीं था...