LIFE CYCLE
LIFE CYCLE लाइफ साइकिल (हिंदी) दस साल पहले गाँव से निकलते वक्त अमित अपने जेब में सिर्फ ईमानदारी लेके निकाला था। शहर में खरीदार तो बहुत मिले पर उसने कभी अपना ईमान बेचा नहीं। इसलिए आज तक उसने कई नौकरियां बदली और कईयों से निकाला गया। और इसलिए अमित वॉचमैन की नौकरी कर रहा था। अपने परिवार की छोटी छोटी जरुरते भी उसे बड़ी लगने लगी थी। रहीसो की बिल्डिंग में उनकी रक्षा करने वाले वॉचमैन कि इज्जत कहा होती है । रहीस तो पैसों से थे पर नियत से तो फकीर ही थे। अब तो मजे में रह रहे शैतानों की रक्षा ,मुश्किल में पड़े भगवान कर रहे थे। घर छोटा भले से हो पर नींद सुकून कि आती है ये बात अमित से बेहतर कौन समझेगा। अमित के घर में आते ही उसका बेटा उसकी सारी टेंशन को अपनी मुस्कान से मिटा देता था। अमित के बेटे का नाम तो राजीव था पर अमित उसे राजू बुलाता था। राजू पढ़ाई में तेज और सब से अच्छा बच्चा था पर फिर भी उसकी एक शिकायत हमेशा आती थी। राजू स्कूल टाइम पर नहीं पहुंच पाता था। अपने जन्म दिन से एक महीने पहले उसने अमित से साइकिल मांग ली। पहली ...