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फूल

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फूल भगवान से पंकज अपने सांवले रंग के लिए नाराज़ था। पंकज के पिता पंकज से पढ़ाई पर ध्यान ना देने से नाराज़ थे। पंकज की कड़ी मेहनत और पढ़ाई को लेकर उसकी चाह ने सब को चौंका दिया। पंकज को आर्यभट्ट का वरदान मिला था के उसको कभी ज़ीरो से ज्यादा अंक नहीं आते थे। एक दिन बड़े गुस्से के साथ पंकज के पिता ने उसके सामने दो रास्ते रखे के "पढ़ाई में अच्छे अंक लाए या फिर दुकान सम्हाले!" तब से पंकज अपने पिता की दुकान संभालता है। अब दुकान ही उसकी दुनिया बन चुकी थी। पंकज का एक बड़ा भाई और एक छोटी बहन थी और उसका कोई छोटा भाई नहीं था । पंकज के कई दोस्त थे पर दुश्मन सिर्फ एक था "दर्शन"। खानदानी कारोबार की तरह पंकज को खानदानी दुश्मनी भी विरासत में मिली थी। दर्शन समझदार था वो छोटी मोटी लड़ाईयो में अपना वक्त और पैसे बर्बाद करना नहीं चाहता था, इसलिए वो खून और अपहरण की धमकी दिया करता था। दर्शन पंकज दोनो के परिवार की दुश्मनी को सारा शहर जानता था। वैसे तो पंकज की दुकान पर लड़कियां काफी आती थी पर जिंदगी में एक भी नहीं । पंकज जितना दिल का अच्छा था उतना शक्ल का नहीं था। पंकज को जो भी लड़की पसंद आई...