अस्तित्व (CHP-2)(Trap of boogieman)
Astitva (Hind) Chapter 2 - Trap of boogieman शाम का वक्त था, एक प्यारा सा बच्चा सोफे पे बैठा टीवी देख रहा था। एक औरत किचेन से बाहर आकर से बोली, " "जय" कल तुम्हारा जन्म दिन है ना? अब तुम पूरे 7 साल के हो गए हो।" छोटा जय दौड़ के उस औरत के पास आया और प्यारी सी मुस्कान के साथ बोला, "आप मेरे लिए नए कपड़े लाई?" घर का माहौल पूरा बदल गया जब घर के ओर बढ़ते हुए पैरो की आवाज आने लगी। "उस बच्चे को हमें देदो " दरवाजे को तेजी से पीटते हुए आवाज आती है। वो औरत काफी डर गई और जय को पकड़ लेती हैं और पीछे के दरवाजे की तरफ जय को ले जाते हुए बोली, " अब आगे का सफर तुम्हे अकेले ही तय करना होगा, भागो रुकना मत जब तक तुम सुरक्षित जगह पे नहीं पहुंच जाते, भागो!!!" जय काफी डर गया और बाहर बड़ी तेजी से भागता है। भागते भागते जब जय मुड़ के घर की तरफ देखता है ,तभी उसे काफी तेजी से गोली की आवाज आती है और जय अपने बुरे सपने से उठ जाता है। आंख खुलते ही निकिता उसके बिस्तर के सामने खड़ी रहती है और जय से बोलती है, "तुम हमेशा सपने में इतना ही चिल्लाते हो?" ...