असितित्वा (astitva)

Astitva (Hind) 

Chapter 1 - Intro of devil 


एक अनाथालय में कई बच्चे रहते है । सब बच्चे एक से बढ़कर एक ,जो ये सपना देखते है कि एक दिन कोई आएगा उनको अपने घर और दिल में जगह देगा । जो भी बच्चा गोद लेने आता है ,वो एक स्वस्थ बच्चे की चाह रखता है इसलिए उन बच्चो को कोई अपने घर नहीं ले जाता जो शारिरिक या मानसिक तौर पर कमजोर होते है । 15 साल के जय जिसकी तरफ कोई देखता भी नहीं घर लेजाना तो दूर की बात है क्योंकि वो हमेशा सांत बैठा रहता है , जय किसी से बात नहीं करता , उसका कोई दोस्त नहीं था। 


एक पुलिस का काम सबकी सुरक्षा करना होता है पर कुछ लोग पुलिस की ताकत का अपने फायदे के लिए इस्तमाल करते है। मितेश गावड़कर एक करप्ट ऑफिसर है जो पैसों के लिए कुछ भी कर सकता है। उसने अपनी पोस्ट भी घूस देकर हासिल की थी इसलिए वो अपनी पोस्ट की कोई इज्जत भी नहीं करता । उसका तबादला हाल ही में मुंबई में हुआ है।


जय जिस अनाथालय में रहता था वो ज्यादा बड़ा नहीं था । इसलिए वहां ज्यादा लोग नहीं आते थे। वहां पे फंड की भी काफी समस्या होती थी । पैसे ना होने के कारण वहां बच्चे बड़ी मुश्किल से अपना गुजारा करते थे। वहां के बच्चो को बहुत मुश्किल से खिलौने मिलते थे , इसीलिए बच्चे उन खेलौनो को काफी सम्हाल के रखते थे। जय एक लौता बच्चा था जिसके पास कोई खेलौना नहीं था ,वो ज्यादा तर अपना समय अकेले में ही बिताता था । जय के कोई दोस्त ना होने के कारण किसी को फर्क नहीं पड़ता के जय कहा अपना समय बीतता था।


एक नया सीनियर ऑफिसर हमेशा सारे क्रिमिनल्स की लिस्ट देखता है ताकि वो वहां के हालात समझ सके । पर मितेश अमीरों की लिस्ट मंगवाता है ताकि वो समझ सके के कहा से कितना पैसा निकाले। उसे लिस्ट में एक नाम दिखता है पंकज वर्मा का जो कई कपड़ों के दुकान मालिक है । 



अनाथ बच्चे काफी मुश्किल से अपनी पढ़ाई सरकारी स्कूल में पूरी करते है। जय इतिहास की कक्षा में बैठा होता था । और टीचर श्री लक्ष्मीनरायण अनाथालय का इतिहास बता रहे थे ,जय को अपने अनाथालय के इतिहास में कोई रुचि नहीं थी और नाही वहां के बच्चो को। जय क्लास में भी अकेला ही बैठता है, टीचर भी उसपे कुछ खास ध्यान नहीं देते।क्लास से थका जय आराम करने अपने बिस्तर पर जा ही रहा था के उसे सारे बच्चे ग्राउंड पे जाते दिखे।



पुलिस की गाड़ी लेके मितेश पंकज के दुकान पे चला गया,जहा पंकज सब से हिसाब ले रहा था। अंदर आते ही मितेश वहीं खड़े एक लड़के से टकरा गया और उसे धक्का देते हुए पंकज की तरफ चला गया । मितेश अपने गंदे पैर और नजर लेके दुकान के अंदर अगया।

पंकज हैरानी से देखते हुए कहता है "अरे इंस्पेक्टर साहब आइए , बताइए क्या चाहिए आपको" 

मितेश सभी औरतो को देखते हुऐ कहता है "मै यहां हाल ही में ट्रांसफर हुए हूं और यहां से गुजरते समय सोचा लक्ष्मी जी के दर्शन कर लुं" ।

पंकज अपना चस्मा उतारते हुए उसे कहता है "मै कुछ समझा नहीं" 

मितेश हस्ते हुए कहता है  "समझ जाएंगे जब ये सारी दुकान बंद हो जाएंगी "

पंकज पसीना पोछने लगा और कहा "ये आप क्या कह रहे है सर"।

मितेश पंकज के पास आके कहता है "पर आप इसे रोक सकते है, बस! मुझे हर महीने 10 हजार पहुंचा दिया कीजिए"

पंकज उससे गुस्से से कहता है  "ये ग़लत है, मै आपको अपने कमाई का एक भी पैसा नहीं दूंगा"।

मितेश पंकज के चस्मे को निचे फेंक देता है और उसे पैर से मसलते हुए कहता है " ज्यादा कुछ नहीं बस तुम्हारी सारी दुकाने बंद हो जाएंगी और अगर कोई गुंडा तुम्हारे घर वालो पे हमला करेगा तो मै कुछ नहीं कर पाऊंगा। 

पंकज गुस्से से मितेश के आंखो में देखते हुए उसे बोलता है "तुम्हारे ही जैसा एक करप्ट पुलिसवाला था जिसने सब का जीना हराम कर दिया था , पर भगवान ये सब देख रहा था , एक दिन उसका ऐक्सिडेंट होगया जिसमें वो मर गया , क्या लगता है वो एक भी पैसा उपर लेके गया होगा"।

मितेश पंकज के चस्मे को जोर से लात मरते हुए चिल्लाता है "हा!!! ठीक तेरे जैसा भी एक बेवकूफ़ था जिसने मुझे पैसे देने से इंकार कर दिया , उसको मैने इतना टॉर्चर किया यहां तक कि उसके परिवार का घर से निकलना भी मुश्किल कर दिया था इसीलिए उसने खुदखुसी कर ली, कहां है तेरा भगवान!! बोल!!"।

पंकज उसे धीमी आवाज में बोलता है " तू जल्द ही मिलेगा भगवान से "।

मितेश पंकज का कॉलर पकड़ कर कहता है " हा और वो भी लक्ष्मी जी से मिलना है।

मितेश जोर जोर से पैर पटकते हुए और चिलाते हुए जाते वक्त बोलता है के "अगर पैसे टाइम पे नहीं पहुंचे तो तू उपर टाइम पे पहूंच जाएगा"।



अनाथालय के ग्राउंड से अचानक आती आवाज सुनकर जय वहां गया। तब जय ने देखा के कुछ नए बच्चो के साथ एक आदमी वहां पर खड़े, श्री लक्ष्मीारायण को सम्हालने वाली महिमाजी और वहा के ट्रस्टी से बात कर रहे थे। थोड़ी ही देर में सभी बच्चो को वहा पर बुला लिया गया , और ये बताया गया के अब वो नए बच्चे उनके ही साथ रहेंगे थोड़े दिनों के लिए। क्योंकी उनके अनाथालय में आग लग गई है और अब उनके पास कोई जगह नहीं है। उस अनाथालय के वापस बनने तक वे सारे बच्चो को यही रहेना होगा।

नए बच्चो में एक लड़की जय को लगातार देख रही थी ,पर जय ने थोड़ा भी उसपे ध्यान नहीं दिया। महिमाजी उन सब को एक दूसरे का दोस्त बनाने को कहकर वहां से चली गई। सब बच्चे थोड़ी ही देर में एक दूसरे से घुल मिल गए। 

वो लड़की अपने दोस्तो के साथ जय के पास आई और बोली "मैने तुम्हे नोटिस किया के तुम किसी से बात नहीं करते इसका मतलब तुम सब को जानते हो, या तुम गूंगे हो"। 

जय तब उंसे बिना कोई प्रतिक्रिया दिए बाजू हटने को कहता है। 

तब वो लड़की जय को रोकते हुए कहती है "अरे!! बुरा मान गए क्या, में तो मजाक कर रही थी।"

तभी उस लड़की के दोस्तो में से एक कहता है "कोई फायदा नहीं ये हमारे किसी काम का नहीं है। 

तभी वो लड़की उसे गुस्से से देखते हुए बोली " वो में सोच लूंगी तुम चुप रहो या यहां से चले जाओ"। ये सुनकर उनके दोस्त वहां से चले गए।

वो लड़की जय का हांथ पकड़ कर एक मुस्कुराहट के साथ कहती है " मेरा नाम निकिता है!!, और तुम्हारा???



मितेश सुबह पुलिस स्टेशन आता था और शाम तक अपनी काली कमाई से कमाए सारे पैसे बार में उड़ा देता था। कुछ दिन उसने ऐसे हि बिताए । शनिवार के दिन मितेश रात के 2 बजे तक बार में दारू पिया । काफी रात हो चुकी थी , सारी दुकान बंद हो चुकी थी और दारू पिके मितेश गाड़ी ठीक से नहीं चला पा रहा था। अचानक उसके गाड़ी के टायर पंचर हो गया। आस पास की एक भी दुकान नहीं खुली थी ।

मितेश गाड़ी से उतारा और बोल "तुझे भी यही पंचर होना था , थोड़ी दूर और चल देती तो मेरा घर आ जाता"। गाड़ी वहीं छोड़ कर मितेश लड़खड़ाते हुए चल दिया घर की तरफ ।

चलते चलते वो काफी थक गया था । उसे बहूत प्यास लग रही थी और नींद भी आ रही थी। तभी उसे एक बच्चा कुछ बिस्लेहरी की बॉटल लेके जाता दिखा । मितेश उसके पास दौड़ के गया और उससे एक बॉटल छीनकर पानी पीने लगा,, 

पानी पीने के बाद वो उस लड़के से मितेश बोला " अबे तू इतनी रात को यहां क्या कर रहा है बे!!!।

वो लड़का बोला "मेरी मा बीमार है और मुझे पैसे चाहिए तो मै रात को भी काम कर रहा हूं!!!। 

तब मितेश उसे हटाते हुए बोला "ठीक है चल "

वो लड़का कमजोर आवाज में बोला "पर इसके पैसे "".

मितेश उसपे ध्यान ना दे के वहां से घर की तरफ चला गया।

घर पहुंच कर बिना जूते उतारे हॉल के सोफे पे बैठ गया और सो गया।

मितेश के कानों में एक आवाज गई । जब उसने आंख खोली तो टीवी की रोशनी उसके आंखो में चुब रही थी । आंखे जब पूरी तरह से खुली तोह उसने देखा के एक बच्चा उसके सामने बैठा है, पर उसके पीछे टीवी की रोशनी के वजह से उसे समझ नहीं रहा कौन है।

जब वो लड़का मितेश के पास आया तब मितेश को एहसास हुआ कि वो अपने किसी भी अंग को नहीं हिला पा राहा है, और उसी गुस्से से मितेश बोला तू वहीं बिसलेरी वाला बंदा है ना , तूने पानी में क्या मिलाया था।

तब उस लडके ने कहा "हा!! ,पर मै तुमसे वहां पहली बार नहीं मिला , हम पंकज की दुकान में भी मिल चुके है।

मितेश गुस्से में चिल्लाते हुए बोला "तुझे पंकज ने भेजा है ना " 

तब उस लडके ने हंसते हुए कहा "नहीं!! उसका इससे कोई लेना देना नहीं है"।

तब मितेश उसकी आंखो में देखते हुए बोला "तब कौन है बे तू!!"।

तब वो लड़का हंसना बंद कर के कहता है "चल तुझे तेरे यमराज का नाम बता देता हूं!!!!!जय!!!!!।

तब मितेश परेशान होकर बोलता  है "तू जय हो या वीरू में क्या करू।"

जय टीवी के सामने से हट कर कहता है "अभी तू ये देख"।

मितेश देखता है के जो मितेश और पंकज में बात हुई थी उसका रेकॉर्डिंग टीवी पे चल रहा था।

मितेश गुस्से और हस्कर बोला "तोह ब्लैकमैल करना चाहता है !! क्या चाहिए तुझे ।

जय स्माइल के साथ बोला "तुझे पता है के तुझसे पहले भी यहां एक पुलिस ऑफिसर था"।

मितेश जय की बात काटते हुए कहता है, हां पता है उसका ऐक्सिडेंट हो गया था !!!।

जय मितेश की बात काटते हुए कहता है "नहीं! मैने उसे मारा था। 

मितेश अटकते हुए बोला " तो इसी लिए तूने मुझे जहर दिया"।

जय टीवी से अपना पेनड्राइव निकलते हुए बोला" इस ड्रग्स का असर कल सुबह तक चला जाएगा , पर तुम कल देखने के लिए जिंदा नहीं बचोगे।

मितेश तेजी से हाफते हुए बोला" तुझे कितना पैसा चाहिए मैं दूंगा पर प्लीज मुझे जाने दे"।

जय अपने हांथ के ग्लव को कसते हुए बोला "अगर तू अपना काम ठीक से करता तो शेर की तरह मरता या एक सम्मान की जिंदगी जीता ।

जय किचन की तरफ जकते हुए चिल्लाया "पर लालच ,तुम्हारा लालच जिसने तुम्हारे लिए चूहे जैसी मौत चुनी।

मितेश जानता था के उसके पास कोई और रास्ता नहीं है तभी वो जोर जोर से चिल्लाने लगा "बचाओ- बचाओ"

जय गैस का पाइप काटते हुए बोला " तुम्हे पता है इंसान की नींद 3 बजे सब से गहरी होती है, और अभी 3 बज रहे है , तोह तुम्हारा चिल्लाना व्यर्थ है।

जय किचन से बाहर आके मितेश के पास आकर बैठ जाता है और ठोस आवाज में कहता है "तुमने कितनो की जिंदगी खराब की है , और कितने तो मर गए है ना?, अब समय आगाया है तुम उन सब से माफी मांग लो इसी लिए मै तुम्हे उनके पास भेज रहा हूं"

मितेश थक चुका है इसलिए वो जय से धीमी आवाज में बोलता है "क्या तुमने उस पुलिस वाले को भी मेरी तरह मारा था"

जय उठ गया और दरवाजे के तरफ जाके बोला "नहीं!! मैने तो उसे आसान मौत दी थी ,"

मितेश जय से कहता है "मारना है तो जल्दी करो में थक गया हूं इससे"।

जय दरवाजा खोलते हुए बोला "मै तुम्हे नहीं मारूंगा ,ये अच्छा काम तोह तुम्हारे किचन की गैस करेगी "। 

"शैतान को मेरा नमस्कार देना"

 जय दरवाजा बंद कर के वहा से चला गया।


जय जनता था के वो अनाथालय के सामने वाले गेट से नहीं जा सकता। इसीलिए जय चुप चाप पीछे के गेट से अंदर जा रहा था।

जय को अपने अलावा भी किसी के पैरो की आवाज आई, जब उसने देखा तो वहां निकिता खड़ी थी। निकिता जय की आंखो में देखते हुए बोली "में जानती हूं तुम कहां से आ रहे हो!"।…..



 Chapter 2 - Trap of boogieman


(ये कहानी पढ़ने के लिए आपका शुक्रिया , मै आशा करता हूं के आप मुझे मेरी छोटी - मोटी गलतियों के लिए मुझे माफ़ कर दे।)

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