राज की डायरी

राज की डायरी


13 अप्रैल, 2017

आज फिर घर पर राजीव को लेकर नेहा से झगड़ा हुआ।
मैं जानता हूँ, नेहा मेरी फिक्र करती है। आखिरकार, हमने सात जन्मों का साथ निभाने का वादा किया था।
आज हमारी शादी को चार साल हो गए हैं, और आज का पुरा दिन मेरा पुलिस थाने मे बित गया।
लेकिन कम से कम इस बात की तसल्ली है कि आज राजीव को जेल में नहीं सोना पड़ा।

माँ भी अब कहने लगी है कि मुझे राजीव से दूरी बना लेनी चाहिए।
ऑफिस में लोग मुझसे कन्नी काटने लगे हैं। राजीव को लेकर मैंने कई बार लोगों से बहस की है।
मुझे पसंद नहीं आता जब कोई उसकी बुराई करता है। और उसे भी नहीं... उसने मेरी खातिर अनगिनत लड़ाइया। लड़ी हैं।

जब सुनीता ने मुझ पर झूठा इल्ज़ाम लगाया था, तब सबने मुझसे मुँह मोड़ लिया था।
ना ही मैंने किसी को छेड़ा था, और ना ही किसी को छुआ था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ये सब मेरे साथ क्यों हो रहा है।
लेकिन तब, सिर्फ़ राजीव था जो मेरे साथ खड़ा रहा। सबसे लड़ा, यहाँ तक कि मुझसे भी।
वो मेरे लिए लड़ा, ताकि मैं हार न जाऊँ।

जब भी मुझे लगा कि ज़िंदगी में अब कुछ नहीं बचा, बस वही था जिसने मुझे टूटने नहीं दिया।
वो हमेशा दूसरों की मदद करता था, और आज वही लोग उसे उसकी ज़रूरत के वक़्त पहचानने से इंकार कर रहे हैं।
जब उसने अपने माता-पिता को खोया, तब सब रिश्तेदार आए थे, लेकिन मददगार कोई नहीं।

शायद इसी वजह से उसने शराब पीनी शुरू कर दी।
शराब की वजह से उधार लेना, गुस्से में रहना, और सबसे लड़ते रहना उसकी आदत बन गई।
अगर मैं उसे थोड़ा और वक्त दे पाता, तो ये सब नहीं होता।


15 अप्रैल, 2024

दो दिन हो गए। राजीव का कोई फोन नहीं आया।
शायद इस बार वो सच में सब कुछ ठीक करने की कोशिश कर रहा है, जैसा उसने कहा था।
ये दो दिन मेरे लिए बहुत भारी थे। काम और घर की जिम्मेदारियों से एक पल की भी फुर्सत नहीं मिली।
आज भी थक गया हूँ। सोचा था, घर जाकर नेहा को एक माफ़ी वाला तोहफ़ा दे दूँ, ताकि वो मुझे माफ़ कर दे।

आज भी मुझे याद है, राजीव ने मुझे एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ा था।
उस समय, जब ना किसी रिश्तेदार ने मेरी मदद की थी और ना ही मुझ पर किसी ने भरोसा किया था, तब सिर्फ राजीव था मेरे साथ।


3 जुन, 2017

आज पूरा परिवार मुझे नेहा से तलाक लेने से रोक रहा है।
लेकिन अब मुझे समझ नहीं आ रहा कि मुझे क्या करना चाहिए।

मुझे उसी वक्त समझ जाना चाहिए था, जब नेहा तोहफ़े से ज़्यादा इस बात पर खुश थी कि राजीव का फोन नहीं आया।
शायद ये मेरी ही गलती थी।
अगर उस दिन मैं देर से नहीं आता, तो राजीव मुझसे मिलता, ना कि नेहा से। और मुझ पर का गुस्सा नेहा राजीव पर न निकालती।

राजीव हर जगह से हार चुका था।
उसका घर उसके चाचा ने धोखे से ले लिया था और उसे नौकरी से भी निकाल दिया गया था, क्योंकि वो अपने काम पर ध्यान नहीं दे पा रहा था।
शायद उस रात वो मुझमें एक रोशनी ढूंढने आया था, लेकिन... उसने सिर्फ अंधेरा पाया।

नेहा ने पता नहीं क्या-क्या नहीं कहा होगा, पर जो बात उसे सबसे ज़्यादा चुभी होगी, वो ये थी:
"अगर तू मर जाता, तो राज की ज़िंदगी बेहतर हो जाती। उसे अपने जैसा मत बना।"

मैंने उसी वक्त समझने की शक्ति खो दी थी, जब माँ ने राजीव के बारे में बताया।
मुझे पता था कि मेरा पागलों की तरह दौड़ना और राजीव के दरवाज़े को पीटना कुछ नहीं बदलेगा।

दरवाज़ा टूटते ही मैं अपनी दुनिया बचाने के लिए तेज़ी से भागा, पर... सब खत्म हो चुका था।
मुझे लगा, शायद रोने से उसकी आवाज़ मेरे दिमाग में गूँजनी बंद हो जाएगी, पर ऐसा नहीं हुआ।


4 जुन, 2017

उसके घर में मुझे शराब की एक भी बोतल नहीं दिखी।
सिर्फ़ एक जिम का बैग था... जो मेरे दिमाग से नहीं निकल रहा।
शायद सब ठीक हो सकता था। नहीं... मैं ठीक कर सकता था, जैसे वो करता था।

जिसकी वजह से मैं ज़िंदा हूँ, मैंने उसे मरने दिया।
मैंने अपनी ज़िंदगी को मरने  दिया।



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