अस्तित्व (CHP-2)(Trap of boogieman)

Astitva (Hind) 

Chapter 2 - Trap of boogieman



शाम का वक्त था, एक प्यारा सा बच्चा सोफे पे बैठा टीवी देख रहा था। एक औरत किचेन से बाहर आकर से बोली,

 " "जय" कल तुम्हारा जन्म दिन है ना? अब तुम पूरे 7 साल के हो गए हो।"

छोटा जय दौड़ के उस औरत के पास आया और प्यारी सी मुस्कान के साथ बोला, "आप मेरे लिए नए कपड़े लाई?"


घर का माहौल पूरा बदल गया जब घर के ओर बढ़ते हुए पैरो की आवाज आने लगी। 

"उस बच्चे को हमें देदो "  दरवाजे को तेजी से पीटते हुए आवाज आती है।

वो औरत काफी डर गई और जय को पकड़ लेती हैं और पीछे के दरवाजे की तरफ जय को ले जाते हुए बोली,

 " अब आगे का सफर तुम्हे अकेले ही तय करना होगा, भागो रुकना मत जब तक तुम सुरक्षित जगह पे नहीं पहुंच जाते, भागो!!!"


   जय काफी डर गया और बाहर बड़ी तेजी से भागता है।

 भागते भागते जब जय मुड़ के घर की तरफ देखता है ,तभी उसे काफी तेजी से गोली की आवाज आती है और जय अपने बुरे सपने से उठ जाता है। 

आंख खुलते ही निकिता उसके बिस्तर के सामने खड़ी रहती है और जय से बोलती है,

  "तुम हमेशा सपने में इतना ही चिल्लाते हो?"

जय उठकर दरवाजे की तरफ जाते हुए बोलता है,

  "तुम लोगो को सोते वक्त हमेशा देखती हो क्या?"


   निकिता जय को रोकते हुए बोलती है,

  "तुम्हे मेरा शुक्रिया करना चाहिए मैने किसी को बाताया नहीं के उस रात को तुम कहा गए थे।"

 "तुम्हे उसी वक्त बता देना चाहिए था क्यों के अब तुम ये साबित नहीं कर सकती" ,  यह बोल कर जय वहा से चला जाता है।

निकिता जय का पीछा करते हुए जय से बोलती है,

 "अरे!! मेरी  बात तो सुनो"।

जय रुक जाता है और निकिता को रोकते हुए पूछता है, 

 "क्या तुमने नहा लिया ?"

निकिता शरमाते हुए बोलती है,  "ह...हा!!"

तब जय बोलता है, "तो मै नहा लू?!!"

तब निकिता पीछे हो जाती है।



अनाथालय में सब का खाना पीना एक साथ होता था।

निकिता जय के सामने बैठ गई और अपने दोस्तो को बुला लिया।

निकिता जय को अपने सारे दोस्तो से परिचय कराने जा रही थी।

निकिता अपने बगल में बैठी एक लड़की जो खाना खाते हुए किताब पढ़ रही थी उसके कंधे पे हांथ रखकर उसका नाम "नीलम" बताती है ।

जय गुस्सा हो कर निकिता से बोलता है,

  " मुझे नहीं सुनना इनका नाम! मुझे चैन से खाने दो।"

निकिता उसे हस कर बोलती है,

 "तुम्हे हमसे दोस्ती करने से पहले हमारा नाम तो पता होना ही चाहिए।"

जय उठ कर रमेश से बोलता है,

 "रमेशजी ये पांचों खाने से खेल रहे है ।"


रमेश "श्री राम अनाथालय" को सम्हालता था। जहां निकिता और उसके दोस्त रहते थे। जो कुछ दिन पहले ही जल गया था।

रमेश जोर से चिलाता है,  " अभिषेक , अर्जुन , नीलम , लक्ष्मी, निकिता ये सब करना बंद करो, अब तुम लोग खाने के बाद सारी सफाई अकेले ही करोगे।"

जय वहा से चला गया ।

अभिषेक जो उसमे से सबसे मोटा और ताकतवर था वो भड़कर बोलता है,

  "देखा ये है तुम्हारा जय जिसने हमे फसा दिया।"

नीलम जो पढ़ाई में सबसे तेज पर उसके साथ सबसे पतली भी थी वो बोलती हैं,

  "जैसा दिखता है वैसा है नहीं, बिना कुछ बोले हम सबका नाम जान लिया।"

अर्जुन दिखने में छोटा पर सबसे तेज था और उसी तेजी से वो बोला, "उसको जबरजस्ती हीरो मत बनाओ ।"

लक्ष्मी जो उन सब में से सबसे सीधी पर पढ़ाई में सब से कमजोर थी, वो अभिषेक को बोलती है, 

 "निकिता ने कुछ सोच समझ के ही उसे चुना होगा ना।"


जय आराम करने के लिए अपने बिस्तर पे लेटा ही होता है कि उसे किसी के रोने की आवाज आती है। जब जय आवाज का पीछा करता है तो उसे देखता है के कुछ लड़कियां मिलके एक छोटी सी बच्ची को मार रही थी । उनको देख कर जय समझ जाता है कि वो बच्चे श्री राम अनाथालय के है।

जय जोर से चिल्लाया  "रुक जाओ!!!!"

वो लड़कियां रुक जाती है और आपस में बोलती है, 

 "ये तो वही लड़का है ना , जिसका कोई दोस्त नहीं है!।"

उनमें से दूसरी लड़की बोलती है, 

"हा!! मैने भी सुना है।"

जय गुस्से से उनके पास आते हुए बोलता है, 

"जानना चाहते हो के मेरा कोई दोस्त क्यों नहीं है!!"


जय को गुस्से से आता देख वो लड़कियां डर जाती है और वहा से तुरंत चली जाती है।

जय उस बच्ची का कपड़ा साफ करते हुए बोलता है,

"तुम कितने साल की हो ?

वो बच्ची रो रही थी और अपने हांथ से आंसू पूछते हुए बोलती है" 8 साल की ।"

जय मुस्कुराते हुए बोलता है,

  "तुम्हारा नाम क्या है ।"

वो बच्ची तुरंत जवाब देती है,  " अंजलि !!"

जय पूछता है,  "वो तुम्हे मार क्यों रहे थे ? चलो रमेशजी को बता देते है।"

अंजलि जय को जोर से गले लगाते हुए कहती है,

 " तब वो मुझे और तंग करेंगी ।"

जय को इससे पहले किसीने गले नहीं लगाया था।

जय अंजलि से कहता है, 

" चलो नहीं बताता ,अब तो रोना बंद करो, अब बताओ वो तुम्हे क्यों मार रहे थे ।"

तब अंजलि जय को बताती है, अनाथालय जलने के पहले वहा से बच्चे गायब होते थे, उनका मानना है के विपुल भईया उनको गायब करते थे।

जय अंजलि से पूछता है  "कौन विपुल?"

अंजलि उदाश होकर बोलती है,  

"विपुल भईया बहुत अच्छे थे ,वो सब से अच्छे से बात करते थे, मुझे तो अपनी छोटी बहन बुलाया करते थे , इसी लिए वो लोग मुझे मारते है।"

तब जय अंजलि से बोलता है,

  "चलो!! अब से तुम्हे कोई भी परेशान करे तो मुझे बता देना।"

अंजलि रोने लगी और अपनी आंख मलते हुए बोली,

 "विपुल भईया भी यही बोलते थे और फिर मुझे छोड़ कर चले गए!"

जय अंजलि के सिर पर हांथ रख कर बोलता है,

 "मै कहीं नहीं जाऊंगा और रोती लड़की से कोई दोस्ती नहीं करता तो रोना बंद करो।"



अगले दिन जब खाने का समय होता है तब फिर से वो पांचों जय के सामने बैठ जाते है , जय उनपे ध्यान नहीं देता । 

  निकिता जय से बोलती है ,

" अब तुम्हे हमारे साथ काम करना ही होगा ।"

जय हंसते हुए कहता है,

 " दिन में भी सपने देख रही हो क्या?!"

अभिषेक उसके सामने कुछ तस्वीरे रखते हुए कहता है, 

"ये हमे तुम्हारे कमरे में से मिला !, ये उन्हीं लोगो की तस्वीरे है ना जिनको तुमने मार दिया है?"

जय देखता है कि अर्जुन मितेश के मौत की खबर अखबार में पढ़ रहा है। 

जय बोलता है " चलो कहीं और बात करे"


अनाथालय के मैदान के कोने में एक पेड़ था उसी के पास वो सब जमा हो गए।

जय निकिता से बोलता है,

 "ठीक है में तैयार हूं, माजरा क्या है।"

अभिषेक सब के तरफ देखते हुए बोलता है,

 "मै बताता हूं, ये सब 5 साल पहले सुरु हुआ था , जब रमेश जी के बड़े भाई की हादसे में मौत हो गई थी, उनका नाम राम था और वो रमेश जी से पहले हमारे अनाथालय को सम्हालते थे, अचानक से एक बच्चा अनाथालय से भाग गया, फिर उस दिन से बच्चो का गायब होना सुरु हो गया"।


"ये विपुल कौन है???"  जय अभिषेक से पूछता है।

नीलम जय को बताती है,

  "हमारा मानना है के, विपुल ही बच्चो को गायब कर रहा था।"

तब जय नीलम से पूछता है,

 "तब तुमने विपुल से क्यों नहीं पूछा के वो ऐसा क्यों करता है।"

अभिषेक जय के कंधे पे हांथ रखते हुए बोलता है ,

" तुम्हे क्या लगता है हम ये नहीं सोच सकते थे, वो उसी आग में मर गया जो उसने सबूत मिटाने के लिए लगाई थी।"

जय अभिषेक से पूछता है,  

"क्या हुआ था उस दिन??"

तब लक्ष्मी जय से बोलती है,

 "हमे उस दिन का ज्यादा कुछ याद नहीं है और ना ही याद करना चाहते है।"


जय निकिता से पूछता है,

  "आस पास कितने अनाथालय है पर रमेश जी ने यही अनाथालय ही क्यों चुना? क्या रमेश जी भी तुम्हारे सात है?"

निकिता अनाथालय की तरफ देखते हुए बोली,

"नहीं!!सयाद ये बस एक इत्तफाक था।"

फिर जय निकिता से बोला,

 "तुम्हे क्यों लगता है मै बच्चो को गायब करने वाले को पकड़ लूंगा।"

निकिता आसमान की तरफ देखते हुए जय के तरफ घूमी और बोली,

"मुझे नहीं पता, पर मुझे ऐसा लगा के कोई आवाज मुझे तुम्हारा दोस्त बने को बोल रही है।"

जय सब से पूछता है,

 "तुम लोगो को कैसे पता के मै क्या करता हूं?"

तब अर्जुन जय को बताता है,

"जब से हम यहां आए है तब से निकिता ने हमे तुम्हारे उपर नजर रखने को बोला था।"

अभिषेक बोलता है,  "एक दिन तुम्हारे बिस्तर की तलासी लेते हुए हमें अखबार के काटे हुए टुकड़े और कुछ तस्वीरे मिली , जिससे पता चला के तुमने कितनो को मरा था।"

फिर नीलम बोली,  "जब हमने निकिता को ये सब बताया तब उसने कहा के हमे तुमसे मदत लेनी चाहिए।"



रात के 2 बजे निकिता के कहने पर सब गोडाउन में इक्कठा हो जाते है। निकिता अपना बैग लाती है, जिसमें गायब हुए बच्चो की सारी जानकारी होती है।

तभी निलम निकिता से कहती है,

 " सारी जानकारी तो जल गई थे ना?"

निकिता नीलम से कहती है, 

"नहीं !! ये सब मेरे बैग में था , और अनाथालय के जलते वक्त मै अपना बैग वहा से लेके आ गई थी।"

नीलम निकिता से सारे कागज लेते हुए बोली,

  "लाओ मैं ये जय को दे देती हूं ।"

नीलम जय को सारे कागज देते हुए बोली,

 "तुम्हारी आंखें काफी अलग है।"

तब जय नीलम से बोलता है, "क्या मै अपनी आंखो का इस्तमाल कर लू!!"

जय सारे कागज़ो को अच्छे से पढ़ते हुए बोला "काफी जानकारी इकट्ठा की है तुम लोगो ने।"

लक्ष्मी कहती है,  "असल में तो ये सब निकिता ने इक्कठा किया है।"

निकिता शरमाते हुए बोली,  "ये मैने अकेले नहीं केया।"

जय सारे कागज को देखते हुए बोलता है,

 "तुम लोगो के आंखे खराब है सायाद, क्यों के कोई 3 साल का बच्चा भी बता देगा के सारे गायब हुए लोगो का खून एक जैसा है, ओ नेगेटिव(O-)।"

तभी अभिषेक बोल पड़ा "हा!! ह...हमे पता था बस याद नहीं था।"

जय निकिता के हांथ में सारे कागज देते हुए बोला,

 "ओ नेगेटिव के सारे बच्चे खतरे में है।"

तभी लक्ष्मी जय से पूछती है, 

 " तुम्हारा ब्लड ग्रुप कोन सा है "

जय जवाब देता है  "ओ नेगेटिव ( O-)।"




अगले दिन रमेश महीमा जी से बात कर के श्री लक्ष्मीनारायण अनाथालय में एक आयोजन रखते है। क्यूंकि श्री राम अनाथालय का काम पूरा हो गया है और ये आखरी दिन था।

इसलिए अनाथालय में सारे लोग उसकी ही तैयारी कर रहे होते है के महीमा जी को एक फोन आता है ।

जय के पास जा कर महिमा जी बोलती है, 

"जय बेटा तुमने अनाथालय के बाहर भी दोस्त बनाए है !!,,,उन्हीं में से किसी का फोन आया है" ये कहकर महीम जी जय को फोन देती है।

"कोन बोल रहा है?" जय पूछता है फोन पे।

फोन से आवाज आती है, 

 "कोन बोल रहा है इससे ज्यादा महत्पूर्ण है कि क्या बोल रहा है, अब ध्यान से सुनो, अगली शिकार अंजलि है, अगर तुम उससे दूर रहते हो तो तुम्हे कोई फर्क नहीं पड़ेगा पर अगर तुम अंजलि के साथ ज्यादा समय बिताओगे तो उसका मारना तुम्हारे भावनाओ के लिए ठीक नहीं होगा।"

जय उसकी बात काटते हुए बोलता है, 

"तुम मेरी चिंता मत करो ,  ये बताओ क्या तुम ये सब कर रहे हो।"

हंसते हुए उस अनजान इंसान ने कहा

"नहीं!!अगर मै ये सब करता तो तुम्हे कभी नहीं बताता।"

तब जय पूछता है उससे, "तब हो कोन तुम।"

"मै तुम्हारे अस्तित्व का ही एक हिस्सा हूं, जल्द ही मिलेंगे" कहकर वह अनजान इंसान फोन रख देता है।

फोन महिमाजी को देते हुए जय बोलता है, 

"मै आप से कुछ मांग सकता हूं?"।

महिमाजि कहती है "हा! जरूर , तुमने पहली बार मुझसे कुछ मांगा है, बोलो क्या चाहिए?"

थोड़ी दूर पर खेलती अंजलि के तरफ उंगली दिखाते हुए जय बोलता है "क्या आप अंजलि को यही रोक सकती है ? वो मेरी छोटी बहन जैसी है।"

महिम जी जय से कहती है, " तुम्हे पहली बार किसी से लगाव हुआ है , ठीक है मै रमेश जी से बात करती हूं।"

मंच पर रमेश चढ़ कर सब को सांत करता है और कहता है

"कुछ सुरु करने से पहले मै आप सबको 2 मिनट मौन रखने की विनती करता हूं, ताकि जो बच्चे गायब हुए है उनके आत्मा को सांती मिले!!,,।"

सब सांत होगाए , 2 मिनट बाद जय और बाकी के सब अपनी आंखे खोलते है। जैसे रमेश कुछ बोलने जाता है तभी जय अपना हांथ उपर उठा लेता है।

रमेश मुस्कुरा कर बोला "क्या हुआ बेटा कुछ बोलना है क्या?"

जय अपना सर हिलाता है, और मंच की तरफ चढ़ जाता है।

जय रमेश से माइक मांग कर कहता है 

"यहां कुछ लोग मेरी छोटी बहन को परेशान करते है , अगर किसी ने अंजलि को कुछ भी करने का सोचा तो मै वादा करता हूं वो जरूर पछताएगा।"

रमेश जय से कहता है,

"अगर ऐसी कोई समस्या है तो सबसे पहले हमे बताया करो बेटा।"

जय फिर रमेश से धीमी आवाज में पूछता है "आपको कैसे पता के वो सब मर चुके है? क्योंकि उनकी लाश तो अभी तक नहीं मिली है ना?"

रमेश मुस्कुरा कर कहता है

"मै भी दुआ करता हूं के वो सब ठीक हो!!"


आयोजन खत्म होने के बाद अंजलि जय के पास भाग के आती है और जय का हांथ कश के पकड़ लेती है और कहती है

"आज तो मै यहां से चली जाऊंगी!"

जय उसके आंशु पोंछते हुए कहता है 

"मै तुम्हे जाने दूंगा तब जाओगी ना तुम!"

और तभी वही पे महिमा जी आ जाती है और जय को बाताती है "तुम्हारे लिए एक खुश खबरी है।"

जय उत्साह से बोला,  "अंजलि यही रहेगी?"

महीमाजि अंजलि की तरफ देखते हुए बोली

 " नहीं अंजलि यहां नहीं रह सकती!!"

जय निराश होकर बोलता है

"तब क्या है खुश खबरी है"।

महिमाजीइ जय से बोलती है,

"तुम वहा जा रहे हो!!!"।





अगले दिन जब सब जाने की तैयारी कर रहे थे, तब जय पूरा अनाथालय घूम रहा था। सब बस में बैठ गए थे , पर जय अभी महिमा जी से बात कर रहा था।

अपने आंसू पोंछते हुए महिमा जी जय से बोली

 "तुम अपना खयाल रखना , मुझे पता है मैने तुम पे सब से कम ध्यान दिया है पर प्यार मै तुमको सब के जितना ही करती हूं।"

जय महिमा जी हांथ पकड़ के बोला 

"आप चिंता मत करो ,मै यहां आता रहूंगा।"

जब जय बस मे चढ़ता है तो निकिता उसे बोलती है के उसकी डायरी छूट गई है वहीं पे।

तब जय निकिता की डायरी को अपने बैग में से निकाल के निकिता को दे देता है।

निकिता के पास में बैठी लक्ष्मी जय से बोलती है

"तो अब तुम हमारी छीजे भी चुराने लगे हो।"

तब निकिता जय से पूछती है

"क्या तुमने मेरी डायरी पढ़ी?"

जय निकिता के पीछे वाली सीट पर बैठते हुए बोला

"हा!! पूरी पढ़ी बस एक बात समझ नहीं आई के तुम्हारे डायरी में ऐसा क्यों लिखा है के हमे विभीषण को ढूंढ ना होगा।"

निकिता जय से बोलती है,

"मैने ऐसा कुछ नहीं लिखा, जहा तक मुझे याद है।"

तभी अभिषेक जय से बोलता है 

"विभीषण ने तो राम की मदत की थी ना!!"

तभी लक्ष्मी निकिता से बोली

 " शायद जो हमारी मदत करना चाहता है उसने लिखा ये!!"

"मतलब हमे विभीषण को धुंडना होगा" अर्जुन बड़ी उत्साह से बोला।

नीलम जय के बगल वाली सीट पर बैठ गई, निकिता तुरंत नीलम से बोली,  " तुम यहां क्यों आ गई?"

तब नीलम हंसते हुए बोली 

"तुम क्यों जल रही हो।"

तब जय नीलम से बोलता है

"तुम ये सब क्यों कर रही हो।"

नीलम जय के कान में धीरे से बोलती है

"मुझे लगता है निकिता तुम्हे पसंद करती है, और इसीलिए मुझे उसे तंग करने में मजा आता है।"

तब जय धीरे से नीलम को बोलता है,

"मुझे कुछ गडबड लगती है, मै किस्मत में नहीं मानता , मुझे नहीं लगता निकिता ने मुझे ऐसे ही ढूंढ लिया।"


बस में दूसरी तरफ बैठा अर्जुन उठ कर जय से बोला

 "अब जब हम सब साथ रहने वाले है तो हमे एक दूसरे के बारे में सब पता होना चाहिए।"

"हा!! क्यों नहीं" लक्ष्मी बोली।।


अभिषेक बोला, " मेरा नाम अभिषेक यादव है , मै 16 साल का हूं, चलो मैं तुम्हें अपनी जिंदगी के बारे में बताता हूं - मेरी कहानी एकदम फिल्म की तरह है , मेरे पापा एक साइंटिस्ट थे उन्हें किसी कम्पनी के बारे में कुछ पता चल गया , इसलिए मेरे पूरे परिवार को उसकी कीमत अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी , मै बच गया और अब जिसके वजह से सब हुआ है मै ताकतवर बनकर मै उनसे बदला लूंगा।"


निकिता बोली,  "अब मेरी बारी , मेरा नाम निकिता जैसवाल है मै 15 साल की हूं  और मेरे दादा एक पुलिस कमिस्नर थे , उनकी दुस्मनी कई बड़े लोगो से थी , मुझे आज भी याद है मेरे भाई की शादी थी , इसीलिए परिवार के सारे लोग एक साथ  इकट्ठा थे , सब तैयारियों में लगे थे और मै बाहर अपने दोस्तो के साथ खेल रही थी, एक बड़े से धमाके की आवाज ने सब को शांत कर दिया, तब में काफी छोटी थी, मुझे मेरे पिता के दोस्त ने यहां भेज दिया ताकि मेरी ज़ींदगी को कोई खतरा ना हो।


तभी अर्जुन बोला, "मेरा नाम अर्जुन है और मेरे पास कोई सरनेम नहीं है और मेरे पास अभिषेक जैसी कोई कहानी भी नहीं है, पर जो भी है उसी से काम चला रहा हूं और हा!! मै 14 साल का हूं।"


नीलम बोलती है, "मेरा नाम नीलम गोस्वामी है, मै दिखती नहीं पर मै 17 साल की हूं, मेरे पिता ने मेरी मां को छोड़ दिया और ये बात वो सह ना सकी और उन्होंने आत्महत्या ली, मेरे पिता और रिस्तेदारो ने मुझे पालने से इंकार कर दिया और पिता , पर संपत्ति पूरी रखली , और मै यहां आ गई, मुझे मेरी संपत्ति तब तक नहीं मिलेगी जब तक मै 18 साल से ऊपर नहीं होजरी।"


फिर लक्ष्मी बोली, "मेरा नाम लक्ष्मी है और जब मेरी आंखे खुली तब मै यहां गई थी, इसके अलावा मुझे कुछ याद नहीं है यहां तक अपना सरनेम भी!"


सब जय की तरफ देखने लगे।

तब जय बोला,

"मै तुमपे भरोसा कैसे करू तब तुम्हारे पास मेरे खिलाफ सारे सबूत है!"

फिर अर्जुन बोला, "अगर हम तुम्हे सारे सबूत दे दे तो क्या तुम हम पर भरोसा करोगे?"

जय ने बोला, "अगर तुम लोगों ने उसकी नकल बना ली होगी तो? मुझे सब लोग एक एक खाली कागज पर साइन करके दे दो।"

फिर अभिषेक गुस्से से बोला, "तुम नहीं सुधरोगे।"

निकिता अपने बैग से 5 खाली कागज निकालकर उनमें से एक पर साइन कर के जय को दे देती है।

थोड़ी हिचकिचाहट के बाद बाकी के लोग भी साइन कर के दे देते है।


फिर जय सारे कागज़ अपने बैग में रखते हुए बोला

"मेरा नाम जय है , मै 15 साल का हूं और मेरे पास भी कोई सरनेम नहीं है, मुझे भी कुछ ज्यादा याद नहीं है पर इतना याद है के जब मै महिमा जी के अनाथालय आया था तब मेरा घर पूरा जल चुका था, महिमा जी ने जब पता किया तब पता चला के उस आग में कोई नहीं बचा और तब से मै यहीं रहता हूं।"


बस के रुकने के बाद सारे बच्चे तेज़ी से उतर गए।

जब जय और बाकी सब उतरे तब उन्होंने देखा एक नया और बड़ा बोर्ड लगा था,  ""श्री राम अनाथालय""।

फिर सब जय से एक स्वर में बोले 

"स्वागत है तुम्हारा हमारे…...मतलब तुम्हारे नए अनाथालय में।"

तभी वहा अंजलि आ जाती है और जय का हांथ पकड़ कर बोलती है, "जय भईया, चलो मै आपको पूरा अनाथालय दिखाती हूं।"


सबके जाने के बाद रमेश एक फोन करता है और बड़ी नरमी से फोन पर बोलता है 

"हेल्लो…अनुराग सर सारे बच्चे पहुंच चुके है , और वो भी पहुंच चुका है , आपको जल्द ही ओ नेगेटिव का खून और सारे अंग मिल जाएंगे , आप बस पैसे तैयार रखो।"


दिन का पूरा वक्त जय अंजलि के साथ ही बीतता है ताकि उसे कुछ हो ना जाए।

पर रात को खाना खाते वक्त जय उन पचाे के साथ बैठा होता है और उन से बोलता है

"अगली शिकार अंजलि है और हमे उसे कैसे भी बचाना होगा।"

तब निकिता बोलती है,

"चिंता मत करो उसे कुछ नहीं होगा, हम बच्चो के कमरे पर नजर रखेंगे।"

फिर नीलम सब से बोलती है, 

"ठीक है.. तब 3 लोग बच्चो के कमरों पर नजर रखेंगे और 3 लोग आराम करेंगे ताकि थकने पर वो जगह बदल सके।

फिर लक्ष्मी बोली "मै चाय का इंतजाम करती हूं।"

जय सब की तरफ देखते हुए बोला,

"तो पहले मै अर्जुन और लक्ष्मी नजर रखेंगे।"

अर्जुन अटकते हुए जय बोलता है,

"अगर हम उसे नहीं बचा पाए तो?"

तब जय गुस्से से बोलता है

"तब मै किसी को नहीं छोडूंगा!"



रात के 2 बज गए थे और तभी अचानक से जय को एक आवाज आती है और जब जय वहा जाकर देखता है तो उसे कोई नहीं दिखता।

आते वक्त जय रमेश का दफ्तर खुला हुआ देखता है और तुरंत जय अंदर जाकर छान बीन करने लगता है।"

ढूंढ़ते ढूंढ़ते जय को एक फाइल मिलती है जिसे पढ़ कर जय हैरान होता है, तभी पीछे से एक हांथ आता है और जय को अपने गले के पीछे कुछ चुबने का एहसास होता है जब जय पीछे देखता है तो उसे रमेश दीखता है और जय का सर घूमने लगता है।

तब रमेश हस कर बोलता है,

"चिंता मत करो ये कोई ज़हर नहीं है , ये बस तुम्हे सुला देगा, पर इसका मतलब ये नहीं के ये कमजोर है, थोड़ी देर में तुम्हारा दिमाग काम करना बंद हो जाएगा।"

तभी जय जमीन पर गिर जाता है और कहता है

तुम ये ठीक नहीं कर रहे हो! तुम नहीं बचोगे!"

रमेश जय के पास आते हुए बोलता है

बिल्कुल ऐसे ही मेरे भाई ने भी कहा था, पर मुझे उस मारना पड़ा, उसे पसंद नहीं था ना ये सब!"

जय धीरे धीरे अपना होश खो रहा था और रमेंश की तरफ देखते हुए बोला,

"तुम्हे मारना है तो मुझे मार दो मेरा भी खून ओ नेगेटिव है, पर अंजलि को कुछ मत करो।"

रमेश जय के पास बैठ कर बोला

"मै पागल थोड़ी हूं जो अपने सोने के अंडे देने वाली मुर्गी को मार दू!*

जय रमेश की तरफ देखते हुए बोला, "तुम्हे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।"

रमेश उठ कर जाते होते हुए बोला,

"कीमत हा!! वो तो बहुत अच्छी मिलती है बच्चो के अंगो के बदले"

"मै तुम्हे नहीं छोडूंगा " कह कर जय बेहोश हो गया।



अंजलि की आवाज जय के कानों में अयी।जय बड़ी मुश्किल से उठ कर बच्चो के कमरे की तरफ गया।जब जय वहां पहुंचा तो उसने देखा के वो पांचों जमीन पर बेहोश गिरे थे।

जय तुरंत अभिषेक को उठाता है और कहता है "

रमेश बच्चो को गायब कर रहा था और वो अंजलि को लेगाया!"

अभिषेक और जय तुरंत सब को उठा देते है।

अर्जुन सब से कहता है,

"मै बाहर जाने के सब रास्तों को देख कर आता हूं।"

निकिता अर्जुन को रोकते हुए बोली,

"इसका कोई फायदा नहीं ये हमने पहले भी कीया है, वो बाहर नहीं मिलते"

जय निकिता की बात पर कहता है,

"हा!! इतनी जल्दी वो लोग ज्यादा दूर नहीं जा सकते।"

"मै सारे कमरे देख कर आता हूं " ये कह कर अर्जुन वहा से तुरंत भागते हुए चला गया।

जय निकिता से पूछता है, "ये सब कैसे हुआ?"

निकिता बताती है,

"हम तुम लोगो से जगह बदलने आ ही रहे थे के किसी ने पीछे से मुझ पर वार केया और उसके बाद का मुझे कुछ याद नहीं।"

तब लक्ष्मी जय से बोलती है

"मुझे किसी के गिरने आवाज आती तो हम वहां जा ही रहे थे के किसी ने मुझे बुलाया , उसके बाद का कुछ याद नहीं।"



रमेश को फोन आया तो उसने फोन को उठा के बोला

"हेल्लो… अनुराग सर ,मै आपका ही काम कर रहा था, नहीं अभी तक वो मरी नहीं है, आप चिंता मत करो आपको ओ नगतिव का खून और अंग जल्द ही मिल जायेंगे, ये रमेश गुप्ता का अनुराग मिश्रा से वादा है।" 

ये कह कर रमेश पीछे घूमता है जहां अंजलि को एक बिस्तर पर बांध कर रहा था और अंजलि वहा से निकलने की पूरी कोशिश कर रही थी।


भागते भागते अर्जुन गिर जाता है और जहा वो गिरता है वो जमीन खोकली होती है, तब अर्जुन सबको बुलाने के लिए सब के पास भाग कर जाता है।


रमेश हांथ में इंजेक्शन लेते हुए अंजलि से बोलता है,

"चिंता मत करो इससे तुम्हे बिल्कुल दर्द नहीं होगा"


अर्जुन जय और बाकी लोगों को बताता है के उसे एक खोकली जगह मिली है, जब सब वहा पहुंचे तो उन्हें नीचे जाने का रास्ता दिखा।


रमेश अंजलि की इंजेक्शन लगा देता है और थोड़े ही देर में अंजलि की मौत हो जाती है।

उसी समय जय और बाकी के लोग वहा पहुंच जाते है।

जय अंजलि को मरा देख सदमे से जमीन पे गिर जाता है।

रमेश अपने बाजू में पड़े बंदूक उठा कर सब की तरफ करता है और कहता है,

"ये सब मैंने तुम लोगो के लिए ही किया था, ऐसे ही अनाथालय चलाने के लिए पैसे मिलते है।"

निकिता गुस्से से बोलती है

"हमे तुम अपने लालच से मत जोड़ो, क्या तुम इसके लिए बच्चो को मारोगे?"


जय अपने बाजू में पड़े सलीय को उठा के रमेश की तरफ तेजी से बढ़ता है।

रमेश जय पर गोली चलता है पर जय सारी गोलियों से बच जाता है मानों वो उन्हें देख सकता हो आते हुए, जय अपने हाथ में पकड़े सलिए को रमेश के छाती के आर पार कर देता है और धक्का देते हुए उसी सालिये को दीवाल में भी घुसा देता है और रमेश की बंदूक जय अपने हांथ में ले लेता है।

यह देखकर सब डर जाते है और चिल्लाने लगते हैं।

निकिता डरते हुए कहती है,

"मुझे कुछ सही नहीं लग रहा, हमे यहां से निकलना होगा"

जय पीछे घूमता है , उसकी आंखे पूरी लाल हो गई थी और वो ऐसे देख रहा था मानो सैतांन उन्हें देख रहा हो।

जय को देख सब और डर जाते है और जितना तेज हो सकता है वो उतनी तेजी से भागने लगते है।


तभी जय नीलम के पैर में गोली मार देता है और नीलम तुरंत जमीन पर गिर जाती है।

सब के पैर जम जाते है और नीलम के अलावा किसी की आवाज नहीं आती।

जय रमेश की बंदूक को साफ करते हुए बोला,

"विभीषण ने सिर्फ राम की मदत ही नहीं बल्कि रावण को धोखा भी दिया था।"

तभी अभिषेक डर और गुस्से से बोला,

"तुम पागल हो गए हो क्या?!"

तब जय अभिषेक को जवाब देता है,

"पागल तो मै तब हो गया था जब मैंने नीलम की फाइल रमेश के दफ्तर में पढ़ी थी।"

जय अपने हांथ में लिए हुए बंदूक को नीलम के दूसरे पैर की तरफ करता है और कहता है,

"इन सब पर से अपना सम्मोहन(hypnosis) उतारो वरना तुम्हारा दूसरा पैर भी उतना ही दर्द करेगा।"

नीलम अपना हांथ जमीन पर पीटते हुए कहती है 

"ये आवाज सुनने के बाद तुम लोग को सब याद आजाएगा।"

लक्ष्मी अपना सर पकड़ कर कहती है,

"मुझे सब याद रहा है, तुम्हारी मां सम्मोहन (hypnosis) करने में माहिर थी।"

अर्जुन लक्ष्मी की बात पूरी करते हुए बोला,

"तुम्हरे पिता को भी तुम्हारी मां ने सम्मोहन कर के ही शादी की थी, इसी लिए तुम्हारी माँ ने आत्महत्या कर ली!"


निकिता के आंशू नहीं रुक रहे थे और बड़ी कठोर आवाज में बोली

वो तुम थी जिसने विपुल को मरा और अनाथालय को जलाया था और सारा इल्ज़ाम विपुल पर लगा दिया।

नीलम के पैर से बहुत खून निकल रहा था इसीलिए नीलम दीवाल का सहारा ले कर बैठ गई और कहने लगी

रमेश ने कहा था के इस काम के बाद वो मेरे 18 साल के उपर होने का कागज़ मुझे दे देगा, और मेरी संपत्ति दिलाने में मेरी मदत करेगा, मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था , अगर मै जल्दी नहीं करती तो मेरी सारी संपत्ति मेरे रिश्तेदार खा जाते।

निकिता गुस्से से बोली ,

"तुम 5 साल से मासूम बच्चो को मार रही हो, तुमने विपुल को मार कर सारा दोष उसपे लगा दिया और कहती हो के कोई और रास्ता नहीं था।"

तब नीलम निकिता से बोली

"5 नहीं, 3 साल मैंने बच्चो को सम्मोहन कर रमेश को सौंपा था, जब उसे पता चला के विपुल और तुम सब उसके बारे में जान गई हो तो उसने मुझसे तुम्हे सम्हालने को कहा।"


तभी अर्जुन कहता है,

"मुझे याद अगाया है , तुमने मुझे बात करने के लिए अकेले बुलाया था और फिर अपने सम्मोहन से मेरी यादाश्त मिटा दी।

नीलम अपने पैर को देखते हुए बोली

सिर्फ तुम्हारी नहीं मैने निकिता , लक्ष्मी और अभिषेक की भी यादाश्त मिटा दी थी, पर विपुल पर मेरा सम्मोहन नहीं चला जैसे जय पर नहीं चला , मैंने बाहोत कोसिस की पर आखिर में मुझे विपुल को मारना ही पड़ा जिसमें मेरी मदत रमेश ने भी कि थी, उसने कहा के मै अनाथालय को आग लगा दू जिससे सारे सबूत विपुल के साथ जल जायेंगे।"

जय अंजलि की लाश को देख रहा था और उसका गुस्सा बढ़ते ही जा रहा था।

नीलम का बोलना रुकते ही जय नीलम की ओर घूमकर उसे गोली मार देता है।

अभिषेक गुस्से से बोलता है,

"ये तुमने क्या किया अब हम पुलिस को कैसे साबित करेंगे?"

जय की हालात अभी भी ठीक नहीं थी और लड़खड़ाते हुए अभिषेक के पास जा कर बोला

मेरे बैग में नीलम का साइन किया हुआ कागज़ है , जिसमें ये लिख देना के नीलम पुलिस को सब सच बताने जा रही थी और पुलिस से ये कह देना के रमेश को पता चला तब उसने नीलम को मर दिया और तुम लोगो ने अपनी जान बचाने के लिए रमेश को मार दिया।"  यह कहकर जय बेहोश हो गया।


अगले दिन जब जय को होश आया तो पुलिस जा चुकी थी और उसे पास निकिता , अभिषेक, लक्ष्मी और अर्जुन खड़े थे।

लक्ष्मी बोली "चलो अच्छा है के तुम्हे होश आगया।"

तब जय सब से बोलता है "मुझे माफ़ करना मैंने तुम लोगो को मुसीबत में डाल दिया था!"

तभी अर्जुन कहता है "कोई बात नहीं ,उस समय तुम होश में नहीं थे।"

निकिता को कहती है, "तुम्हे यहां से जाना होगा!"

अभिषेक निकिता से बोला " ये तुम क्या बोल रही हो!"

निकिता अभिषेक से बोलती है,

"मै जो भी बोल रही हूं सोच समझ कर बोल रही हूं।"

तब अर्जुन पूछता है, "पर क्यों?"

निकिता जय को बताती है कि उसका श्री लक्ष्मीनारायण अनाथालय जाना कोई इत्तफाक नहीं था।

जय हैरान हो जाता है और निकिता से कहता है

"तुम कहना क्या चाहती हो?"

तब निकिता जय को बोलती है,

मैंने तुम्हे पहली बार अनाथालय में नहीं देखा था, मुझे तुम्हारी तस्वीर विपुल ने दिखाई थी और उसने कहा था के तुमसे दोस्ती कर तुम्हे यहां से दूर रखु।"

जय निकिता से पूछता है " विपुल को मेरी तस्वीर कैसे मिली?"

फिर निकिता जय को बताती है के "विपुल ने वो तस्वीर रमेश के दफ्तर से चुराई थी , उसने कहा था के वो तुम्हारे साथ कुछ बुरा करने वाले है।"

तब जय निकिता से बोला "अगर रमेश मुझे मारना ही चाहता तो कब का मार देता।"

अर्जुन जय से कहता है, "हो सकता है के वो तुम्हे मारना ही नहीं चाहते हो!"

तभी वहा पर महिमा जी आ जाती है और जय के पास बैठ कर बोलती है,

"तुम ठीक तो हो ना?"

जय हैरान हो जाता है और मुस्कुराहट के साथ बोलता है

"मै ठीक हूं पर आप यहां क्या कर रही है?"

महिमा जी जय के सर पर हांथ रख कर बताती है,

"अब से मै ही इस अनाथालय को सम्हालूंगी, दोनों अनाथालयों के बच्चो को मिला कर एक बड़ा अनाथालय बनाऊंगी"

जय तुरंत बोलता है, "ये तो काफी अच्छी बात है!"

तभी महिमा जी हस्कर जय से बोलती है,

मै तो तुम्हे खुशखबरी देना ही भूल गई , तुम्हे किसीने गोद ले लिया है।"

जय हैरान हो जाता है और पूछता है,

"क्या... कोंन है वो??

महिमा जी जय का हांथ पकड़ कर बोलती है,

"वो काफी अमीर आदमी है, तुम वहा जरूर खुश रहोगे,


उन का नाम है……."अनुराग मिश्रा"







                                     To be continued…….


                            


(ये कहानी पढ़ने के लिए आपका शुक्रिया, मै आशा करता हूं के आप मेरी छोटी मोटी गलतियों के लिए मुझे माफ़ कर दोगे)

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Comments

  1. Pls upload chapter3 as soon as possible...im so excited

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