फूल
फूल
भगवान से पंकज अपने सांवले रंग के लिए नाराज़ था।
पंकज के पिता पंकज से पढ़ाई पर ध्यान ना देने से नाराज़ थे।
पंकज की कड़ी मेहनत और पढ़ाई को लेकर उसकी चाह ने सब को चौंका दिया।
पंकज को आर्यभट्ट का वरदान मिला था के उसको कभी ज़ीरो से ज्यादा अंक नहीं आते थे।
एक दिन बड़े गुस्से के साथ पंकज के पिता ने उसके सामने दो रास्ते रखे के "पढ़ाई में अच्छे अंक लाए या फिर दुकान सम्हाले!"
तब से पंकज अपने पिता की दुकान संभालता है।
अब दुकान ही उसकी दुनिया बन चुकी थी।
पंकज का एक बड़ा भाई और एक छोटी बहन थी और उसका कोई छोटा भाई नहीं था।
पंकज के कई दोस्त थे पर दुश्मन सिर्फ एक था "दर्शन"।
खानदानी कारोबार की तरह पंकज को खानदानी दुश्मनी भी विरासत में मिली थी।
दर्शन समझदार था वो छोटी मोटी लड़ाईयो में अपना वक्त और पैसे बर्बाद करना नहीं चाहता था,
इसलिए वो खून और अपहरण की धमकी दिया करता था।
दर्शन पंकज दोनो के परिवार की दुश्मनी को सारा शहर जानता था।
वैसे तो पंकज की दुकान पर लड़कियां काफी आती थी पर जिंदगी में एक भी नहीं ।
पंकज जितना दिल का अच्छा था उतना शक्ल का नहीं था।
पंकज को जो भी लड़की पसंद आई उसे कभी पंकज पसंद नहीं आया।
इस दुनिया में लोग सूरत को सीरत से ज्यादा प्राथमिकता देते है ।
पंकज अपने दोस्तो से ज्यादा मिलता नहीं था पर खबर सबकी रखता था।
ऐसे ही एक रात दुकान बंद करने से थोड़ी देर पहले पंकज को एक लड़की उसके जिंदगी के अंधेरे में रोशनी बन कर आती दिखी।
उसके खूबसूरती को देख कर पंकज का दिल तेज़ी से और दिमाग धीमे काम करने लगा।
पंकज का ग्राहकों को संभालने का सालो का अनुभव धरा का धरा रह गया जब उस लड़की ने पंकज को कुछ सामान की सूची दी।
पर पंकज की खराब किस्मत उसे खुश रहने कहा देती , उस सूची में से कुछ सामान पंकज की दुकान पर नहीं था।
पंकज को रेगिस्तान में पानी का ना होना और उसके दुकान में उस सामान का ना होना एक जैसा महसूस हो रहा था।
रात काफी हो चुकी थी तो उस लड़की ने पंकज से बोला के वो कल वापस आयेगी।
पंकज सिर्फ मुस्कुराकर "हा!!" बोला।
अब पंकज को सिर्फ एक बात का डर था के कहीं अलार्म ना बजना सुरु हो और ये सब बस एक सपना निकले।
अगले दिन पंकज काफी बन ठन कर बैठा था।
पूरे दिन पंकज बहुत खुश था और उस लड़की के आते ही उसकी खुशी दोगुनी हो गई।
पंकज दिखता जितना भी खराब था पर बांते मीठी कर लेता था।
पंकज अपना सरनेम उसके नाम के आगे जोड़ने लगा मन में जब उसने अपना नाम बताया "सोनिया"।
सोनिया अब रोज उसके दुकान से समान लेने लगी और पंकज अपनी मीठी बातो से उसका मन जीत लेता था।
मा-बाप के गुजरने के बाद और रिश्तेदारों से उम्मीद खोने के बाद सोनिया अपने छोटे भाई के साथ ही रहती थी।
सोनिया हमेशा अपने भाई को लेकर परेशान रहती थी और पंकज से उसी के बारे में बात किया करती थी।
एक दिन पंकज से मिलने के बाद घर जाते वक्त सोनिया अपना बैग उसकी दुकान पर भूल गई।
जब तक पंकज का ध्यान गया तब तक वो जा चुकी थी।
पंकज उसके बैग में उसका पता ढूंढने लगा ताकि उसका पैग वापस कर सके।
तब पंकज को सोनिया के भाई की एक फाइल मिली , पंकज उसे बड़े ध्यान से पढ़ने लगा और उसी में सोनिया का पता उसे मिल गया।
अगले दिन पंकज उसके घर चला गया।
सोनिया उसे देख हैरान थी।
घर के अंदर आते ही पंकज सोनिया से उसके भाई के बारे में पूछने लगा।
तब सोनिया ने उसे बताया के वो बाहर खेल रहा है।
सोनिया अपने भाई को बुलाने बाहर चली गई।
तभी सोनिया के चीखने कि आवाज पंकज को सुनाई दी , पंकज भाग कर रोड के पास गया।
सोनिया रोड के किनारे बैठी रो रही थी।
पंकज उसके पास गया तब सोनिया उसे रोते हुए बताने लगी के उसके भाई को कुछ लोग ले कर चले गए और मुझे ये कागज दे कर बोले के दर्शन की तरफ से पंकज को दे देना।
पंकज के हाथ में कागज आते ही पंकज उसे बड़े ध्यान से पढ़ने लगा, जिसमें लिखा था के "सोनिया के भाई को बचना हो तो बीस लाख रुपए उसे दे कर उसे मेरे पास अकेले भेज देना।
पंकज के दिमाग में तूफान सा चल रहा था और पंकज एक लम्बी सांस ले कर बोला "चिंता मत करो तुम्हारे भाई को कुछ नहीं होगा।"
अगले दिन पंकज कहीं से उधार लेकर सोनिया के हाथ में पैसे रख कर बोला "चिंता मत करना ,सब ठीक हो जाएगा ।
सोनिया वहां से पैसे ले कर चली गई ।
एक दिन बाद दर्शन के कदम जब पंकज की दुकान पर पहुंचे तब पूरे मोहल्ले को लगने लगा था के अब उन्हें एक बड़ी लड़ाई देखने को मिलेगी।
दर्शन अपने गुस्से को अपनी आवाज में दिखाते हुए बोला "मेरे बारे में ये सब क्या अखवा फैला रहा है तू , के मैने किसी बच्चे का अपहरण किया है।"
पंकज के दिमाग में चल रही उसकी परेशानी उसके चेहरे से ही पता चल रही थी।
दर्शन बिना रुके बोले जा रहा था के "पंकज को सोनिया ने बेवकूफ बनाया है।
पंकज गुस्से से बोला "उसका नाम सोनिया नहीं आंचल था और उसने ये सब अपने भाई के लिए किया, मैंने उसके भाई के मेडिकल रिपोर्ट में पढ़ लिया था।
मुझे उसका पता दे , मै उसे बताता हूं के दर्शन का नाम इस्तेमाल करने की सजा क्या होती है" दर्शन पंकज की तरफ देखते हुए बोला।
पंकज दर्शन की बात काटते हुए बोला "उसने वो घर कब का बेच दिया है।
दर्शन अपने फोन को चलाते हुए बोला "मै भी देखता हूं के कहा तक भागेगी।
तभी पंकज दर्शन को माना करते हुए बोला "तू उसे कुछ नहीं करेगा !"
तब दर्शन हस्ते हुए बोला "ये भी ठीक है , तेरे पैसे थे मै क्यों परेशान होऊ और जब पैसे खत्म हो जाए तब और पैसे भेज देना।"
"इश्क़ भी कितना मीठा ज़हर है ना? " कहकर दर्शन वहा से चला गया।
पंकज का ध्यान पूरी तरह से दर्शन पर नहीं था वो मन में एक ही चीज बोल रहा था "आशा करता हूं के, उसके भाई का इलाज उतने पैसे में हो जाए!"
सच्ची कहानी इसके लाल सब्दो में है ,बस शुरू से पढ़ना सुरु करो ।
Please forgive me for my mistake and thanks for reading this far and thanks for everyone for supporting & giving me feedback & your precious time.
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Chaa gaya guru tune pankaj sahi kata hai😂
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